‘ म ‘ से मोदी,मुसलमान और मार्केट

Kaushlendra

अभी चुनाव में दो ही शब्द महत्वपूर्ण हो गए है वह है मोदी और मुसलमान। भड़काऊ भाषण की भी कहानी ख़त्म हो गयी है। भड़के हुए नेता पर लगे प्रतिबन्ध की खबर भी बासी हो चुकी है। ठाकुर राजनाथ सिंह द्वारा मुसलमानों की टोपी पहनने की खबर ताजा हो गयी है। राजंनाथ सिंह ठाकुर हैं। तलबारविहीन ठाकुरों के इकलौते राजा हैं। जब से ई ठाकुर भाजपा अध्यक्ष बने हैं तब से भाजपा का चेहरा बदल गया है। क्षत्रियों की वैसे ही ब्राह्मणों से सनातन दुश्मनी रही है। भाजपा में आजतक किसी ने इतनी ब्राह्मणों की दुर्गति नहीं की होगी जितनी ठाकुर ने की है। बारी बारी से इन्होने सभी ब्राह्मण नेताओं को किनारे लगाया है। शुक्ला, जोशी, त्रिपाठी,मिश्रा,पाण्डेय,तिवारी सभी पानी पी रहे हैं। भाजपा में जिसकी चलती बहाल हुई वे सब दलित, पिछड़ा और मुसलमान हैं। कितना बुरा हो रहा है पंडित भाईयों के साथ ?
वैसे वंचितों की रहनुमाई ज्यादातर ठाकुरों ने ही की है। गौतम बुद्ध भी क्षत्रिय थे जिन्होंने ब्राह्मणवाद के खिलाफ जिहाद किया था। बाद में मांडा के राजा विश्वनाथ प्रताप ने मंडल कमीशन लागू किया। अर्जुन सिंह जैसे क्षत्रिय नेता ने भी आगे बढ़कर काम किया। कमोवेश दिग्विजय सिंह की भी यही पहचान रही है। मोदी जैसे चाय बेचने वाले पिछड़े नेता मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाकर राजनाथ ने कम बड़ा काम नहीं किया है ? संघ के एकलौते राजपूत सरसंघचालक रज्जू भैया के अपमान का बदला तो नहीं ले रहे हैं राजनाथ सिंह ? जोशी साहेब रह रहकर राजनाथ को श्राप दे रहे होंगें। सुषमा जैसी भितरघुन्नी नेता कैसे ई सब वर्दाश्त कर रही होंगीं पता नहीं। राजनाथ न केवल रार-शुद्दर को गले लगा रहे हैं वल्कि खाँटी मियां को भी साथ लाने से बाज नहीं आ रहे हैं। पतित हिन्दू और भूतपूर्व हिन्दू सभी संघ में वर्चस्व स्थापित करने की स्थिति में आ गए हैं। सब घोर अनर्थ हो रहा है। सोशल मीडिया में ब्राह्मण भाईयों की पीड़ा रह रहकर बाहर आ रही है।
मोदी अब सहयोगी के विना ही प्रधानमंत्री बन रहे हैं। मुसलमान भ्रम में बने रहें मोदी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। बावजूद मोदी ने कहा कि मुसलमान एक बार उनसे मिल भर लें तो प्यार करने लगेंगें। मोदी वास्तव में मुसलमान से प्यार करना चाहते हैं। इसलिए ‘ आई लव यू ‘ कहने की उन्हें जरूरत नहीं। इसलिए गुजरात को लेकर मोदी माफी नहीं मांगना चाहते हैं। मोदी टोपीधारी भी नहीं होना चाहते हैं। हिन्दू अच्छा हिन्दू बने और मुसलमान अच्छा मुसलमान बनें तो देश में सौभाग्य घटित हो जायेगा।
मोदी सुदर्शन का चेला नहीं बनना चाहते हैं जो अकसर ‘ सेमेटिक रेस ‘ की बात करते थे। वह कहते थे की मुसलमान किसी देश की राष्ट्रीयता से समरस हो ही नहीं सकते हैं। ये जहाँ रहे बवाल काटते रहे। ‘ हिन्दू घटा की देश बंटा ‘ इन सारे बौद्धिकों को राजनाथ बेकार साबित कर दे रहे हैं। संघ राजनाथ को शह दे रहे हैं मौलवी बनने के लिए। अगर मोदी किसी भी कारण से पिछड़ते हैं तो राजंनाथ का यह सेकुलर फेस काम आयेगा। भीतर भीतर मोदी को पछाड़ देने की मंशा भी हो सकती है राजनाथ की इस साजिश से इंकार भी नहीं किया जा सकता है।
सियासत में सब चलता है। यही काम सोनिया ने किया था। उनका बुखारी से मिलना भाजपा को नागवार लगा था। वही काम राजनाथ कर रहे हैं। ‘ आप करें तो रासलीला और करें तो करेक्टर ढीला ‘ वाली बात हो गयी है।
लोग गांधी को मुसलमान के हितैषी मानकर गरियाते रहे हैं। पर सच यह है की गांधी कभी भी मस्जिद की सीढ़ी पर पाँव नहीं रखा। न ही इफ्तार पार्टी की न ही कभी नमाज अदा की। गांधी तो महान हिन्दू थे। मुझे लगता है की राजनाथ को भी महान हिन्दू बनना चाहिए। टोपी नहीं पहनना भी सियासत थी और पहनना भी सियासत ही है। मुसलमान इसमें कहीँ नहीं है। वह कांग्रेस के लिए भी वोटरलिस्ट ही था और भाजपा के लिए वोटरलिस्ट ही है। इन्हे देश का आम नागरिक समझा ही नहीं जा रहा है। इसमें मुसलमान की भी बड़ी भूमिका है। वह भी इसी नियति का शिकार होना चाहता है।मोदी कार्पोरेट के लीडर हैं। बीस प्रतिशत मुसलमान को बाजार ख़ारिज नहीं कर सकता। इतने बड़ी खरीदार वर्ग में स्ट्रीम में लाना भी है। मोदी नहीं भी चाहेंगें तब भी मार्किट मजबूर करेगा टोपी पहनने के लिए। बाजार को अभी दंगा नहीं,शांति की जरूरत है। डम्पिंग मार्केटिंग में माल की व्यापक खपत जरूरी है। और यह सब शांति के माहौल में ही सम्भव होगा। यह है मोदी और मार्किट का ‘ राज ‘,. पंडित भाई निराश मत हों। मोदी को धोबिया पाट न सिखायें। मोदी के मार्किट में आपकी पुरोहताई भी खूब चलेगी। भाग्य,भगवान और भाँटगिरी को भी बाजार मिलेगा। एक बार जोड़ से बोलो -हिन्दू मुसलमान जिन्दावाद

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